मंगलवार, 16 जून 2009

भारतीय लोकतंत्र में परिवारवाद

१५ वे लोकसभा चुनावो के बाद एक नारा चारो तरफ़ सुनाई दिया ...लगभग हर राजनीतिक दल ने कहा की अब युवा भारत का समय है और राजनीती में युवाओ को लाया जाएगा !सुनकर अच्छा लगा लगभग सभी युवाओ के मन में आस जगी , चुनाव संम्पन्न हुए और और अच्छी संख्या में युवा संसद बने! इसके बाद दौर शुरु हुआ हर दल में युवाओ को आगे लाने का ! सभी खुश हुए ,पर जब हमने इस युवा लोकतंत्र को ध्यान से देखा तो यही लगा की शायद वास्तविक लोकतंत्र कभी सम्भव नही है , राहुल गाँधी , अखिलेश यादव, धर्मेन्द्र यादव,प्रिया दत्त,सचिन पायलट , जीतें प्रसाद, ऐसे ही कई नाम इस फेहरिस्त में है जो राजनीती में सत्ता को विरासत के सवाल ये नही है!
यहाँ प्रश्न ये नही है की ये योग्य है या नही बल्कि सवाल लोकतंत्र के उस महान लक्ष्य का है जो शासन में जनता की अधि से अधिक सहभागिता चाहता है! आज सभी राजनितिक डालो ने भारत के लोकतंत्र को अपनी जागीर समझ ली है ,नेहरू जी की कांग्रेस ने तो ये मान लिया है की नेहरू जी का परिवार ही इस देश में एकमात्र सत्ता को संभाल सकता है, और कांग्रेस नेता अब नेहरू परिवार के सामंत रह गए है ,जिनका अलग होकर अस्तित्व संकट की स्थिति आ जाती है! ये बात लगभग हर दल में है ,जिस तरह मुलायम सिंह यादव जी ने केन्द्र की राजनीती में चले गए, उ.प्र। का नेतृत्व शिवपाल जी को अपने पुत्र अखिलेश और भतीजे धर्मेन्द्र यादव को युवा चेहरों के नाम पर पुरे उ.प्र की कमान सौप दी, सवाल ये नही की ये कितने योग्य है, सवाल फ़िर वही है की आखी ये कौन सी परम्परा डाल
रहे है और क्या पार्टी में उनके परिवार के अलावा और कोई योग्य नही है ...ये सामान्य बातें नही है, ये लोकतंत्र के लिए खतरनाक है क्योकि जिस राज शाही परिवारवाद सामंतवाद से लड़कर हमने लोकतंत्र को स्थापित किया है वो केवल स्वप्न बनके ही रह जाएगा! सामान्य व्यक्ति के लिए लोकतंत्र में केवल वोट देने का ही काम नही है , बल्कि उनमे योग्य व्यक्तियों को आगे आकर जनता का प्रतिनिधित्व संभालना चाहिए इसलिए लोकतंत्र को महत्व दिया जाता है ताकि आम आदमी को अधिकार मिले , पर यहाँ तो उल्टा ही है कही पर तानाशाही केंद्रीयकृत नेतृत्व ,तो कही एक ही परिवार की परम्परा ,और ये परम्परा शीर्ष से लेकर दलों के निचले स्तर तक ऐसे ही है ,वही मध्य कालीन सामंतवादी स्थिति है,,,,,,,,,,,,शायद वास्तविक लोकतंत्र असंभव है क्योकि लोकतंत्र को जीवित रखने का दारोमदार जिनपे है वो ही इसकी हत्या कर रहे है,...............






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